देहरादून के बढ़ते प्रदुषण के लिए ट्रैफिक पुलिस ज़िम्मेदार ?

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देहरादून-  कुछ ही दिनों में राज्य अपना 17वां स्थापना दिवस मनायेगा, पिछले सत्रह सालो में देहरादून ने बहुत कुछ देखा और झेला, एक सुन्दर शहर जिसे एक समय साक्षर दून सुन्दर दून का नारा दिया गया था कैसे धीरे धीरे उसकी आबादी लगातार बढती चली गयी, कैसे एक समय देहरा के नाम मशहूर देहरादून के मौसम के चर्चे पूरे विश्व में थे, घने पेड़ो और लीची की मिठास वाला देहरादून अब तो किताबो में भी नहीं मिलता, शहर का बढ़ता प्रदूषण और व्यवस्था दोनों का भगवान् ही मालिक हैं.

इस शहर में बढ़ते प्रदूषण के लिए ट्रैफिक व्यवस्था ज़िम्मेदार नहीं है क्या? शहर का आलम यह हो चला है की जगह जगह प्लास्टिक की रस्सियों की गाँठ लगाकर बैरिकेट लगा दिए गए हैं कहीं कहीं तो नाड़े बाँध दिए गया हैं.

देखने में आ रहा है कि देहरादून में सडको के डिवाइडर बंद किये जा रहे है….जो सीधे तौर पर प्रदुषण को बढ़ावा दे रहे है और साथ ही इनको बंद करने से ट्रैफिक व्यवस्था में भी कोई सुधार नहीं आ रहा है.

डिवाइडर बंद करने का क्या है नुक्सान ?

आपको छोटा सा उदहारण देते है, यदि आपने देहरादून रेलवे स्टेशन से घंटाघर जाना हो तो आपको रेलवे स्टेशन से पहले सहारनपुर चौक जाना होगा फिर वहां से भंडारी चौक से यु टर्न लेकर फिर घंटाघर आना होगा…फिर वहां से आप रेलवे स्टेशन के सामने से होते हुए घंटा घर की ओर जायेंगे …. पूरी कवायद में कोई १ किलोमीटर फालतू चलेंगे . मतलब, समय और पेट्रोल दोनों की बर्बादी.

व्यवस्था के नाम पर प्रयोगों से परेशान हो रही है जनता … लेकिन देखता कौन है ? नीचे विडियो लक्षण चौक जाने वाले रास्ते का है … शहर के पोर्श इलाको में से एक … माना जाने वाले इस इलाके में कुछ समय पहले तक सिटी बस और टेम्पो भी जाते थे … और हम इस इलाके में रहने वाले लोग भी नहीं जा सकते ….

लाल बत्ती और सिर्फ एक ट्रैफिक पुलिस से जहां व्यवस्था की जा सकती है वहा ये नाड़े वाली व्यवस्था क्यों ?

अब सवाल  

क्या शहर की व्यवस्था सुधारने की ज़िम्मेदारी किसी एजेंसी या बुद्धिजीवी को दी गयी हैं  या फिर यहाँ पिछले १७ सालो से ट्रैफिक व्यवस्था पर प्रयोग चल रहा है ?

अगर प्रयोग नहीं हैं और यह फैसले सोच समझ कर लिए जा रहे है तो थोडा हिसाब इसका भी लगाया जाना चाहिए कि प्रति घंटा कितनी गाडिया रेलवे स्टेशन से घंटा घर जाती है और प्रतिघंटा कितने किलोमीटर की फालतू यात्रा होती है, कुल कितना तेल बर्बाद होता है और उस तेल से हर घंटे कितना प्रदुषण होता है ? 

 

 

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